























भारत सरकार की नई जेट फ्यूल (ATF) हार्मोनाइजेशन योजना को लेकर एक्सपर्ट नरेंद्र तनेजा ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। बिजनेस टुडे टेलीविजन के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतें बाजार की रियल टाइम परिस्थितियों के अनुरूप रहनी चाहिए। उनका मानना है कि भारत जैसे देश में, जहां ऊर्जा जरूरतों का करीब 90% हिस्सा आयात से पूरा होता है, वहां कीमतों को आर्टिफिशियल तरीके से कंट्रोल करना लंबे समय में सही रणनीति नहीं होगी।
नरेंद्र तनेजा ने कहा कि भारत को बाजार को ज्यादा भूमिका निभाने का मौका देना चाहिए। उनके मुताबिक, देश को अपनी परिवहन और विमानन नीतियों को भी रिव्यू करनी होगी ताकि भारतीय एयरलाइंस वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें और एक मजबूत नेटवर्क तैयार हो सके।
एयरलाइंस के लिए बड़ी लागत है ATF
तनेजा ने कहा कि ATF, एयरलाइंस के लिए सबसे बड़े खर्चों में से एक है। ऐसे में सिर्फ ईंधन की कीमतों को अलग से देखने के बजाय पूरे विमानन क्षेत्र की आर्थिक स्थिति को समझना जरूरी है।
उनका कहना है कि भारत का एविएशन सेक्टर अभी पूरी तरह संतुलित नहीं है। बाजार में कुछ बड़ी कंपनियों का दबदबा है और एयरलाइंस लगातार मुनाफे की चुनौतियों का सामना कर रही हैं। ऐसे में अगर कीमतों को आर्टिफिशियल रूप से स्थिर रखने की कोशिश की जाती है, तो इससे थोड़े समय के लिए राहत जरूर मिल सकती है, लेकिन इससे परिचालन और वास्तविक कारोबारी लागत का सही आकलन प्रभावित हो सकता है।
सिर्फ ATF नहीं, पूरी ऊर्जा नीति का मुद्दा
तनेजा ने जेट फ्यूल की कीमतों को देश की व्यापक ऊर्जा नीति से जोड़कर देखा। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत की तेल मांग मौजूदा 5.5-5.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन से बढ़कर 8 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच सकती है।
उन्होंने कहा कि जब देश अपनी जरूरत का लगभग 90% ऊर्जा आयात करता है, तब बाजार की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उनके मुताबिक, तेल, गैस और एलपीजी जैसे आयातित ऊर्जा स्रोतों के लिए बाजार आधारित मूल्य निर्धारण समय की जरूरत बनता जा रहा है।
जरूरतमंदों को मिले मदद, सभी को नहीं
नरेंद्र तनेजा ने साफ किया कि वह सरकार की भूमिका खत्म करने की बात नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि व्यापक सब्सिडी देने या सभी उपभोक्ताओं को राहत देने के बजाय जरूरतमंद लोगों को लक्षित सहायता दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा, “जिन्हें सुरक्षा की जरूरत है, उनकी रक्षा कीजिए। लेकिन बाकी मामलों में मांग, आपूर्ति और बाजार की ताकतों को काम करने दीजिए।”
तनेजा का मानना है कि ATF हार्मोनाइजेशन पर चल रही चर्चा सिर्फ विमानन क्षेत्र तक सीमित नहीं है। यह उस बड़े सवाल से जुड़ी है कि बढ़ती ऊर्जा मांग, वैश्विक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक जोखिमों के बीच भारत अपनी ऊर्जा कीमतें किस तरह तय करेगा।
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