

























5G Network Slicing: भारत में 5G नेटवर्क अब लगभग हर जगह पर आ चुकी है और जहां अभी नेटवर्क नहीं है वहां तेजी से काम चल रहा है, लेकिन इसके साथ अब एक नई बहस भी शुरू हो गई है कि क्या आने वाले समय में इंटरनेट भी 'VIP' और 'जनरल' कैटेगरी में बंट जाएगा?
इसकी वजह है 5G की एक नई तकनीक, जिसे Network Slicing कहा जाता है। हाल ही में Bharti Airtel के 'Priority Postpaid' प्लान्स की चर्चा के बाद यह मुद्दा फिर सुर्खियों में आ गया है।
आखिर क्या है 5G Network Slicing?
सीधी भाषा में समझें तो 5G Network Slicing एक ऐसी तकनीक है, जिसमें एक ही मोबाइल नेटवर्क को कई 'वर्चुअल लेन' में बांटा जा सकता है। यानी अलग-अलग यूजर्स को उनकी जरूरत और प्लान के हिसाब से अलग इंटरनेट क्वालिटी दी जा सकती है।
उदाहरण के लिए:
यानी एक ही नेटवर्क पर अलग-अलग लोगों को अलग एक्सपीरियंस मिल सकता है।
विवाद क्यों शुरू हुआ?
मुद्दा तब गर्म हुआ जब 'Priority Postpaid' जैसी सेवाओं की चर्चा सामने आई। सवाल यह उठने लगा कि अगर कुछ लोगों को 'फास्ट लेन' मिलेगी तो क्या बाकी लोगों का इंटरनेट जानबूझकर धीमा किया जाएगा?
भारत में करीब 90-95% मोबाइल यूजर्स प्रीपेड हैं। यानी अगर पोस्टपेड यूजर्स को ज्यादा प्राथमिकता मिलेगी, तो इसका असर करोड़ों आम लोगों पर पड़ सकता है।
Net Neutrality क्या है?
नेट न्यूट्रैलिटी का मतलब है कि इंटरनेट पर हर यूजर और हर वेबसाइट के साथ बराबरी का व्यवहार होना चाहिए यानी टेलीकॉम कंपनियां यह तय नहीं कर सकतीं कि कौन सा ऐप तेज चलेगा और कौन सा धीमा।
भारत में 2016 से नेट न्यूट्रैलिटी के नियम लागू हैं। इन्हीं नियमों के कारण कंपनियां किसी ऐप या वेबसाइट को ब्लॉक या स्लो नहीं कर सकतीं। अब सवाल यह है कि 5G Network Slicing कहीं इन नियमों को कमजोर तो नहीं कर देगा?
कंपनियां क्यों चाहती हैं यह तकनीक?
टेलीकॉम कंपनियों का कहना है कि यह तकनीक भविष्य के लिए जरूरी है।
1. इंडस्ट्री और बिजनेस के लिए जरूरी
स्मार्ट फैक्ट्री, रोबोटिक्स, ड्राइवरलेस कार, रिमोट सर्जरी और स्मार्ट बिजली ग्रिड जैसी चीजों के लिए सुपर-फास्ट और भरोसेमंद नेटवर्क चाहिए। सामान्य इंटरनेट से यह हमेशा संभव नहीं होता।
2. 5G पर भारी निवेश
कंपनियों ने 5G स्पेक्ट्रम खरीदने और नेटवर्क लगाने में हजारों करोड़ रुपये लगाए हैं। उनका कहना है कि प्रीमियम सेवाओं के जरिए ही वे इस निवेश की भरपाई कर पाएंगी।
3. दुनिया में तेजी से बढ़ रहा ट्रेंड
जर्मनी, जापान, चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देश पहले से Network Slicing पर काम कर रहे हैं। भारत भी इस दौड़ में पीछे नहीं रहना चाहता।
फिर डर किस बात का है?
1. आम यूजर्स का इंटरनेट धीमा होने का खतरा
सबसे बड़ा डर यही है कि कंपनियां प्रीमियम प्लान बेचने के लिए सामान्य यूजर्स की स्पीड कम कर सकती हैं।
2. अमीर और गरीब इंटरनेट का फर्क
अगर पोस्टपेड या महंगे प्लान वालों को बेहतर इंटरनेट मिलेगा, तो डिजिटल असमानता और बढ़ सकती है।
3. बड़ी कंपनियों को फायदा
आलोचकों का कहना है कि टेलीकॉम कंपनियां अपने पार्टनर ऐप्स या सर्विसेज को ज्यादा तेज स्पीड देकर छोटे स्टार्टअप्स को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
कंपनियों की दलील क्या है?
टेलीकॉम कंपनियों का तर्क है कि अलग-अलग क्वालिटी की सेवाओं के लिए अलग कीमत लेना हर सेक्टर में सामान्य बात है। उदाहरण के तौर पर फ्लाइट में Economy और Business Class, ट्रेन में General और AC Coach, बैंकों में Priority Banking और अस्पतालों में Private Room जैसी सुविधाएं पहले से मौजूद हैं।
कंपनियों का कहना है कि जब दूसरे सेक्टर्स में प्रीमियम सर्विस को स्वीकार किया जाता है, तो इंटरनेट सेवाओं में अलग क्वालिटी और प्रीमियम प्लान देने पर सवाल क्यों उठाया जा रहा है।
फर्क यहां है...
एक्सपर्ट का कहना है कि फ्लाइट में Economy सीट वाले यात्री की फ्लाइट जानबूझकर धीमी नहीं की जाती। डर इस बात का है कि कहीं टेलीकॉम कंपनियां बेसिक इंटरनेट क्वालिटी को ही कमजोर न कर दें।
यानी प्रीमियम यूजर को 'बेहतर' सर्विस देने में दिक्कत नहीं है, लेकिन बाकी लोगों की सेवा 'खराब' नहीं होनी चाहिए।
सरकार और TRAI के सामने सबसे बड़े सवाल
अब Telecom Regulatory Authority of India और टेलीकॉम विभाग के सामने कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या 5G Network Slicing आने के बाद भी प्रीपेड यूजर्स की इंटरनेट क्वालिटी सुरक्षित रह पाएगी या नहीं।
इसके साथ ही यह चिंता भी है कि कहीं कंपनियां प्रीमियम प्लान बेचने के लिए आम यूजर्स की इंटरनेट स्पीड जानबूझकर धीमी तो नहीं करेंगी।
इसी वजह से अब यह बहस तेज हो गई है कि क्या 5G दौर के लिए नए नेट न्यूट्रैलिटी नियम बनाए जाने चाहिए और क्या Network Slicing को लेकर अलग रेगुलेशन लाने की जरूरत पड़ेगी।
आगे क्या हो सकता है?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत इस तकनीक पर पूरी तरह रोक लगाने की बजाय एक बीच का रास्ता अपना सकता है। यानी इंडस्ट्री, अस्पताल और इमरजेंसी जैसी जरूरी सेवाओं के लिए Network Slicing की अनुमति दी जा सकती है।
साथ ही कंपनियां प्रीमियम इंटरनेट प्लान भी ऑफर कर सकेंगी, लेकिन सभी यूजर्स के लिए एक न्यूनतम इंटरनेट क्वालिटी तय की जाएगी। इसके अलावा टेलीकॉम कंपनियों को आम ग्राहकों की इंटरनेट स्पीड जानबूझकर कम करने की अनुमति नहीं होगी।
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