

























Motor Insurance: ज्यादातर गाड़ी मालिक मोटर इंश्योरेंस को एक औपचारिकता मानकर भूल जाते हैं। पॉलिसी ईमेल में पड़ी रहती है और साल-दर-साल रिन्यू होती रहती है, लेकिन बीमा का असली टेस्ट तब होता है जब कोई हादसा हो जाए। सड़क पर एक्सीडेंट हो, बारिश में इंजन खराब हो जाए या गाड़ी चोरी हो जाए, तब ग्राहक को लगता है कि बीमा कंपनी सारा खर्च उठाएगी। पर हकीकत अक्सर इसके उलट होती है।
इंडिया टुडे को कवरश्योर (CoverSure) के संस्थापक और सीईओ सौरभ विजयवर्गीय ने बताया कि जब उनकी टीम क्लेम रिजेक्शन के मामलों की जांच करती है, तो वजहें बेहद सामान्य निकलती हैं। उनके मुताबिक 10 में से 9 मामलों में ऐसी गलतियां होती हैं जिन्हें आसानी से टाला जा सकता था।
क्लेम रिजेक्ट होने की असली वजह
सौरभ विजयवर्गीय का कहना है कि लोग अक्सर पॉलिसी रिन्यूअल की तारीख भूल जाते हैं या एक्सपायर्ड ड्राइविंग लाइसेंस के साथ गाड़ी चलाते हैं। कई बार लोग अपनी कार में सीएनजी किट या महंगे एक्सेसरीज तो लगवा लेते हैं, लेकिन इसकी जानकारी इंश्योरेंस कंपनी को नहीं देते। एक्सपर्ट कहते हैं कि ये कोई तकनीकी पेंच नहीं हैं, बल्कि पॉलिसी की शर्तें हैं जिन्हें लागू करना कंपनी का हक है।
अक्सर ग्राहकों को लगता है कि उनके साथ धोखा हुआ है, लेकिन असल में यह जानकारी के अभाव का मामला है। पॉलिसी के 40 पन्नों के भारी-भरकम दस्तावेज को कोई ध्यान से नहीं पढ़ता और न ही कोई उन्हें सरल भाषा में समझाता है। यही गैप क्लेम के समय परेशानी का सबब बनता है।
'कॉम्प्रिहेंसिव' कवर का मतलब पूरा कवर नहीं
भारत में सबसे बड़ी गलतफहमी 'कॉम्प्रिहेंसिव मोटर इंश्योरेंस' को लेकर है। लोग सोचते हैं कि इसमें सब कुछ कवर है। सौरभ बताते हैं कि एक बेसिक कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी इंजन में पानी जाने (हाइड्रोस्टेटिक लॉक) से हुए नुकसान को कवर नहीं करती।
मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे शहरों में बाढ़ के दौरान इसी वजह से सबसे ज्यादा विवाद होते हैं। इसके अलावा, बिना 'जीरो डेप्रिसिएशन' कवर के, रिपेयरिंग के दौरान बदले गए पार्ट्स की पूरी कीमत नहीं मिलती और ग्राहक को अपनी जेब से 40% से 60% तक खर्च उठाना पड़ता है।
इन छोटी बातों का रखें ख्याल
सौरभ विजयवर्गीय के अनुसार, हादसे के बाद सबसे बड़ी गलती सर्वे से पहले गाड़ी की मरम्मत कराना है। इसके अलावा, मौके की फोटो न लेना या गंभीर मामलों में एफआईआर न कराना भी क्लेम को कमजोर कर देता है।
हालांकि, आईआरडीएआई (IRDAI) के नियमों के मुताबिक, सिर्फ सूचना देने में देरी के आधार पर क्लेम खारिज नहीं किया जा सकता, लेकिन समय पर जानकारी देना प्रक्रिया को आसान बनाता है।
क्लेम खारिज हो जाए तो क्या करें?
अगर आपका क्लेम खारिज हो जाए, तो निराश न हों। आप कंपनी के पास शिकायत दर्ज करा सकते हैं, आईआरडीएआई से संपर्क कर सकते हैं या इंश्योरेंस ओम्बड्समैन (लोकपाल) का दरवाजा खटखटा सकते हैं, जहां 50 लाख रुपये तक के विवादों का निपटारा मुफ्त में होता है।
此内容由惯性聚合(RSS阅读器)自动聚合整理,仅供阅读参考。 原文来自 — 版权归原作者所有。