
























भारत में 100% एथेनॉल (E100) से चलने वाले वाहनों का रास्ता खुलता दिख रहा है, लेकिन हकीकत में यह अभी दूर की बात है। बिजनेस टुडे के रिपोर्ट के मुताबिक Ministry of Road Transport and Highways ने टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन नियमों में E100 को शामिल करने का प्रस्ताव दिया है, जिससे भविष्य में ऐसे वाहनों का निर्माण संभव होगा लेकिन फिलहाल भारत में कोई भी ऑटो कंपनी E85 (85% एथेनॉल) तक के फ्लेक्स-फ्यूल वाहन भी बाजार में नहीं बेच रही है।
E20 से E100 तक का बड़ा अंतर
भारत जुलाई 2025 तक E20 (20% एथेनॉल ब्लेंड) का लक्ष्य हासिल कर चुका है और 2023 के बाद बने सभी वाहन इसके अनुकूल हैं।
E20 के लिए सिर्फ कुछ तकनीकी बदलाव जरूरी थे, लेकिन E100 के लिए इंजन और कई पार्ट्स को पूरी तरह बदलना होगा। S&P Global Mobility के डायरेक्टर पुनीत गुप्ता के मुताबिक पिस्टन, पाइप, फ्यूल पंप जैसे कई पार्ट्स को एथेनॉल-रेसिस्टेंट बनाना होगा, जो अभी सप्लाई चेन के लिए चुनौती है।
एथेनॉल की कमी भी बड़ी बाधा
भारत एथेनॉल उत्पादन में आत्मनिर्भरता के करीब जरूर है, लेकिन E100 के लिए पर्याप्त सप्लाई नहीं है। ऐसे में सरकार पहले E20 से E25 की ओर बढ़ सकती है। आज दुनिया में ब्राजिल ही एक ऐसा देश है जहां E27 (27% एथेनॉल ब्लेंड) आम है।
पेट्रोल पंप और लागत की चुनौती
E100 लागू करने के लिए पेट्रोल पंपों पर अलग डिस्पेंसिंग सिस्टम, पाइप और स्टोरेज चाहिए होगा, जो अभी मौजूद नहीं है। इसके अलावा E100 वाहनों की कीमत भी करीब 50,000 रुपये ज्यादा हो सकती है, क्योंकि इनमें महंगे, जंग-रोधी पार्ट्स लगेंगे।
माइलेज पर भी असर
एथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल से करीब 35% कम होती है, जिससे E100 पर चलने वाले वाहनों का माइलेज घट सकता है। पहले ही E20 पर 3-6% तक माइलेज गिरने की बात सामने आ चुकी है।
ऑटो इंडस्ट्री पहले से इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन तकनीक पर निवेश कर रही है। ऐसे में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों पर नया निवेश कंपनियों के लिए रणनीतिक चुनौती बन सकता है। मारुति सुजुकी के चेयरमैन आर.सी. भार्गवा ने कहा कि हमारे पास टेक्नोलॉजी है, लेकिन यह इंडस्ट्री-लेवल पर निर्णय होना चाहिए।
एथेनॉल इंडस्ट्री उत्साहित
जहां ऑटो सेक्टर सतर्क है, वहीं एथेनॉल इंडस्ट्री इसे बड़ा अवसर मान रही है। Grain Ethanol Manufacturers Association के अध्यक्ष सी.के. जैन का कहना है कि इससे अनाज और गन्ने की मांग बढ़ेगी, किसानों की आय मजबूत होगी और ऊर्जा सुरक्षा को बल मिलेगा।
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