


























8th Pay Commission: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और शिक्षकों के वेतन ढांचे में बड़े बदलाव की मांग के बीच 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अलग-अलग कर्मचारी संगठनों ने वेतन, भत्तों और सेवा शर्तों में बड़े सुधार का प्रस्ताव सरकार के सामने रखे हैं। अगर ये सुझाव लागू होते हैं, तो हाल के वर्षों का सबसे बड़ा वेतन संशोधन देखने को मिल सकता है।
न्यूनतम वेतन और फिटमेंट फैक्टर पर जोर
प्रगतिशील शिक्षक न्याय मंच (PSNM) ने लेवल-1 कर्मचारियों के लिए न्यूनतम बेसिक वेतन ₹50,000 से ₹60,000 करने की मांग की है, जो फिलहाल ₹18,000 है। संगठन ने फिटमेंट फैक्टर को 2.62 से 3.83 तक बढ़ाने और सालाना इंक्रीमेंट को 3% से बढ़ाकर 6-7% करने का सुझाव दिया है।
PSNM का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच कर्मचारियों की आय में वास्तविक बढ़ोतरी जरूरी है। साथ ही, DA को 50% पर बेसिक पे में मर्ज करने और बच्चों की शिक्षा भत्ता ₹7,000 प्रति माह प्रति बच्चा करने की मांग भी की गई है।
भत्तों और सुविधाओं में बड़ा बदलाव प्रस्तावित
हाउस रेंट अलाउंस (HRA) को 12%, 24% और 36% करने, ट्रांसपोर्ट अलाउंस को न्यूनतम ₹9,000 तक बढ़ाने और ₹2,000 मासिक डिजिटल सपोर्ट अलाउंस देने का प्रस्ताव रखा गया है।
इसके अलावा, रिटायरमेंट पर लीव एनकैशमेंट की सीमा 300 से बढ़ाकर 400 दिन करने, ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) बहाल करने और ग्रेच्युटी सीमा ₹50 लाख तक करने की मांग शामिल है।
चार गुना वेतन वृद्धि की मांग
भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ (BPMS) ने और आक्रामक रुख अपनाते हुए न्यूनतम बेसिक वेतन ₹72,000 करने और फिटमेंट फैक्टर 4 रखने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत टॉप लेवल सैलरी ₹10 लाख तक जा सकती है। संगठन ने सालाना इंक्रीमेंट 6% करने और परिवार की परिभाषा तीन से बढ़ाकर पांच सदस्यों तक करने की भी बात कही है।
आर्थिक तर्क और सरकारी बोझ
BPMS ने अपने प्रस्ताव के समर्थन में कहा कि 2016-17 से 2024-25 के बीच प्रति व्यक्ति आय में 86.76% की बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में वेतन को आर्थिक विकास से जोड़ना जरूरी है।
हालांकि, इन प्रस्तावों के लागू होने पर सरकार के वेतन और पेंशन खर्च में भारी बढ़ोतरी संभव है। फिर भी कर्मचारी संगठनों का मानना है कि बेहतर वेतन से जीवन स्तर सुधरेगा और आर्थिक संतुलन भी बनेगा।
आगे क्या?
अब 8वें वेतन आयोग के सामने चुनौती है- कर्मचारियों की उम्मीदों और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाना। अंतिम सिफारिशें देश के लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स पर सीधा असर डालेंगी।
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