
























मार्च 2026 के आख़िरी हफ़्ते में एक ख़बर आई—पाकिस्तान के बहावलपुर में एक व्यक्ति मारा गया। यह था जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक और 2001 के संसद हमले के मास्टरमाइंड मसूद अज़हर का बड़ा भाई, मोहम्मद ताहिर अनवर।
अब ध्यान खींचने वाली बात क्या थी?
किसने मारा—नहीं पता।
कैसे मारा—नहीं पता।
यही एक पैटर्न सा बनता दिख रहा है। पिछले 5-6 सालों में भारत की धरती पर आतंक फैलाने का इरादा रखने वाले कई पाकिस्तानी और खालिस्तानी आतंकियों को अलग-अलग मौकों पर इसी तरह मौत के घाट उतारा गया है।
किसने मारा—नहीं पता।
और फिर एक शब्द सामने आता है—“Unknown Men।”
पाकिस्तान आरोप लगाता है कि ये RAW के लोग हैं, लेकिन RAW इन आरोपों को तवज्जो ही नहीं देता। अगर आपने धुरंधर 2 देखी है, तो उसमें भी इस तरह के ऑपरेशंस का इशारा मिलता है। लेकिन धुरंधर 2 तो एक फिल्म है… असल में क्या हो रहा है?
क्या R&AW जैसी एजेंसियां वाकई ऐसे ऑपरेशंस को अंजाम देती हैं? CIA और ISI जैसी एजेंसियों पर भी ऐसे आरोप लगते रहे हैं।
तो सोचा, जासूसी की इस दुनिया में थोड़ा गहराई से उतरते हैं—RAW की वर्किंग को समझते हैं, केस स्टडीज़ के ज़रिए, पुराने उदाहरणों के ज़रिए।
और इसलिए आज हमारे साथ हैं इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट Abhinandan Mishra। ये पहले नेवल ऑफिसर रह चुके हैं, नॉवेल लिख चुके हैं, बैंक PO भी रहे हैं और वकालत की पढ़ाई भी की है। लेकिन सबसे खास बात—इन्होंने इंटेलिजेंस एजेंसियों की कार्रवाई पर विस्तार से लिखा है।
इनसे पूछेंगे सारे सवाल। जानेंगे सब। क्योंकि ये है Padhaku Nitin—जहां हम मानते हैं, लाइफ़ है छोटी… जानना सब है।
प्रड्यूसर: मानव देव रावत
साउंड मिक्स: रोहन भारती
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