

















अमेरिका और ईरान के बीच हुआ सीजफायर अभी 24 घंटे भी नहीं टिक पाया है और हालात फिर से बिगड़ते दिख रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर बनी इस अस्थायी शांति में सबसे बड़ी शर्त स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलना थी, लेकिन ईरान ने इसे फिर से बंद कर दिया है।
ईरान ने साफ कहा है कि यह कदम लेबनान में जारी हमलों के जवाब में उठाया गया है। ऐसे में 11 अप्रैल को पाकिस्तान में होने वाली अहम बातचीत से पहले ही समझौता खतरे में पड़ गया है।
लेबनान क्यों बना नया टकराव केंद्र?
इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) ने गुरुवार को हिजबुल्लाह (Hezbollah) के ठिकानों पर अब तक के सबसे बड़े एयरस्ट्राइक किए। सिर्फ एक दिन में 182 लोगों की मौत और 800 से ज्यादा घायल होने की खबर है।
बताया गया कि महज 10 मिनट में 100 मिसाइलें दागकर बेरूत, दक्षिणी लेबनान और बेक्का वैली में बड़े हमले किए गए। इजरायल का आरोप है कि हिजबुल्लाह नागरिक इलाकों से ऑपरेट करता है, जबकि स्थानीय लोग इसे खारिज करते हैं।
सीजफायर की शर्तों पर टकराव
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) और विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) का कहना है कि लेबनान में युद्ध रोकना भी सीजफायर का हिस्सा था।
वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिका दोनों ने साफ कर दिया है कि यह समझौता लेबनान पर लागू नहीं होता।
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, जो इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता का नेतृत्व करेंगे, ने कहा कि अगर ईरान लेबनान के मुद्दे पर बातचीत बिगाड़ना चाहता है, तो यह उसका फैसला है।
होर्मुज पर दबाव, बढ़ी आर्थिक चिंता
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पर भी असर दिखने लगा है। बुधवार को सिर्फ 11 जहाज इस रास्ते से गुजर पाए। ईरान ने कई जहाजों को वापस लौटा दिया और अब तेल ले जाने वाले जहाजों से प्रति बैरल 1 डॉलर तक का टोल वसूला जा रहा है। सुपरटैंकर एक बार में 30 लाख बैरल तक तेल ले जा सकते हैं, जिससे हर यात्रा की लागत में भारी इजाफा हो सकता है।
आगे क्या?
लेबनान को लेकर अलग-अलग दावों ने इस सीजफायर को कमजोर कर दिया है। अब निगाहें 11 अप्रैल को पाकिस्तान में होने वाली बैठक पर हैं, जहां यह तय होगा कि यह समझौता टिकेगा या पूरी तरह टूट जाएगा।
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