

























भारत का ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसी (OTA) बाजार अगले कुछ साल में तेज रफ्तार से बढ़ने की राह पर है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, घरेलू ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसी बाजार का आकार वित्त वर्ष 2027-28 तक बढ़कर 3.84 लाख करोड़ रुपये हो सकता है, जो वित्त वर्ष 2022-23 में 2.08 लाख करोड़ रुपये था। इस दौरान बाजार करीब 13% की CAGR से बढ़ने का अनुमान है।
इसके मुकाबले ग्लोबल ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसी बाजार की ग्रोथ धीमी रहने की उम्मीद है। रिपोर्ट के अनुसार, यह बाजार 2025 के 938 अरब डॉलर से बढ़कर 2029 तक 1.19 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है, जो 6.1% CAGR के बराबर है।
भारत में क्यों बढ़ रही है ऑनलाइन ट्रैवल की मांग?
‘Entering the AI Orbit!’ टॉपिक वाली रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में लोगों की बढ़ती आय, युवा आबादी और तेजी से बढ़ती कामकाजी जनसंख्या ट्रैवल इंडस्ट्री को नई रफ्तार दे रही है। इसके साथ ही एयरपोर्ट, रेलवे, सड़क और जल परिवहन जैसी सुविधाओं में लगातार सुधार होने से यात्रा पहले के मुकाबले ज्यादा आसान और सुविधाजनक हो गई है।
बेहतर इंटरनेट और कनेक्टिविटी, लोगों की बदलती लाइफस्टाइल, घूमने-फिरने पर बढ़ता खर्च और अंतरराष्ट्रीय यात्रा नियमों में ढील भी इस सेक्टर की ग्रोथ को बढ़ावा दे रहे हैं। वहीं, भारत में ऑनलाइन ट्रैवल बुकिंग का बाजार अभी भी पूरी तरह विकसित नहीं हुआ है, जिससे आने वाले वर्षों में इसके तेजी से बढ़ने की बड़ी संभावनाएं दिखाई दे रही हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, देश में ऑनलाइन ट्रैवल चैनल की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2028 तक बढ़कर 65% हो सकती है, जबकि वर्तमान में यह 54% के आसपास है।
AI से बदलेगा ट्रैवल बुकिंग का एक्सपीरियंस
रिपोर्ट के मुताबिक, ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसियां (OTA) अब AI के दौर में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। आने वाले समय में ये प्लेटफॉर्म ग्राहकों को उनकी पसंद और जरूरत के हिसाब से ट्रैवल सुझाव देंगे, रियल-टाइम में ट्रिप प्लान करने में मदद करेंगे और बेहतर पैकेज ऑफर करेंगे। इससे यात्रा की बुकिंग पहले से ज्यादा आसान और पर्सनल हो जाएगी।
साथ ही, अब इंसानी मदद ज्यादातर उन यात्राओं तक सीमित होती जा रही है, जिनमें खास या जटिल जरूरतें होती हैं। AI के बढ़ते इस्तेमाल से ग्राहकों को तेज, आसान और बेहतर अनुभव मिलने की उम्मीद है।
पारंपरिक कंपनियों से तेजी से बढ़ेंगी OTA कंपनियां
मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट का कहना है कि ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसियों की ग्रोथ पूरे ट्रैवल इंडस्ट्री से ज्यादा तेज हो सकती है। इसकी वजह यह है कि ये प्लेटफॉर्म एक ही जगह पर कई एयरलाइंस, होटल और ट्रैवल सेवाओं के विकल्प देते हैं। इससे कीमतों की तुलना करना आसान हो जाता है और ग्राहक अपनी जरूरत के मुताबिक पैकेज चुन सकते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि OTA कंपनियां सीधे सेवा देने वाली कंपनियों और IRCTC के मुकाबले तेजी से अपना मार्केट शेयर बढ़ा सकती हैं।
किन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है?
हालांकि, रिपोर्ट में कुछ जोखिमों का भी जिक्र किया गया है। अगर अर्थव्यवस्था धीमी पड़ती है, लोगों का खर्च कम होता है या कॉर्पोरेट ट्रैवल की मांग घटती है, तो बुकिंग और कंपनियों की कमाई पर असर पड़ सकता है।
इसके अलावा, वैश्विक तनाव, स्वास्थ्य संकट, ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सरकारी नियमों में बदलाव भी ट्रैवल सेक्टर के लिए चुनौती बन सकते हैं।
साइबर हमले, तकनीकी दिक्कतें और ग्राहकों की बदलती पसंद के मुताबिक खुद को जल्दी न बदल पाना भी कंपनियों की प्रतिस्पर्धा को कमजोर कर सकता है।
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