


























अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका और ईरान के बीच इस वीकेंड बातचीत हो सकती है और डील की संभावना भी बन रही है। अगर हालात सुधरते हैं और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आती है, तो भारतीय बाजार के कई सेक्टर्स पर इसका सीधा असर दिख सकता है।
SMC Global Securities के सौरभ जैन ने कहा कि भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में युद्ध रुकने से तेल सस्ता होगा, महंगाई कम होगी, कंपनियों की लागत घटेगी और अर्थव्यवस्था को सहारा मिलेगा।
एविएशन और टूरिज्म को बड़ा फायदा
कम क्रूड प्राइस का सबसे बड़ा फायदा एविएशन सेक्टर को मिल सकता है। InterGlobe Aviation जैसी कंपनियों के लिए ईंधन खर्च कम होगा, जिससे मुनाफा बढ़ेगा। इसके साथ ही Indian Hotels Company Limited और पूरे टूरिज्म सेक्टर में डिमांड बढ़ सकती है।
ऑयल मार्केटिंग और गैस कंपनियां फोकस में
सौरभ जैन के मुताबिक Hindustan Petroleum Corporation Limited जैसी कंपनियां भी फायदे में रहेंगी। वहीं सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स जैसे Indraprastha Gas Limited को स्थिर ऊर्जा कीमतों से सपोर्ट मिलेगा।
ब्रोकरेज हाउस Elara Securities का मानना है कि बाजार पहले ही $85-89 प्रति बैरल के स्तर को प्राइस कर चुका है। ऐसे में बड़ी रैली की गुंजाइश सीमित हो सकती है।
कैपिटल गुड्स और इंफ्रा को राहत
कम तेल कीमतों से ट्रांसपोर्ट और इनपुट कॉस्ट घटती है, जिससे Larsen & Toubro जैसे EPC और कैपिटल गुड्स प्लेयर्स को फायदा मिल सकता है। इससे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की लागत भी कम होगी।
बैंकिंग और कंजंप्शन सेक्टर में तेजी
महंगाई कम होने और रुपया मजबूत होने से बैंकिंग और कंजंप्शन सेक्टर को भी सपोर्ट मिलेगा। लोन ग्रोथ और डिमांड दोनों में सुधार की उम्मीद है।
एक्सपर्ट की रणनीति
Choice Institutional Equities के उत्सव वर्मा का कहना है कि निवेशकों को धीरे-धीरे और चुनिंदा तरीके से निवेश करना चाहिए। उनके मुताबिक प्राइवेट बैंक, डिफेंस, हेल्थकेयर और IT सेक्टर में स्थिर ग्रोथ की संभावना है।
डिफेंस सेक्टर में ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत Hindustan Aeronautics Limited और Bharat Electronics Limited जैसी कंपनियों को एक्सपोर्ट ऑर्डर का फायदा मिल सकता है।
क्या यह रैली पहले ही आ चुकी है?
कुछ ब्रोकरेज का मानना है कि अगर ईरान तनाव कम होता है, तो उसका असर पहले ही बाजार में दिख चुका है। इसलिए आगे की तेजी सीमित रह सकती है।
फिर भी, अगर तेल कीमतों में गिरावट जारी रहती है, तो भारत में कंजंप्शन और ग्रोथ को बड़ा बूस्ट मिल सकता है जो बाजार के लिए पॉजिटिव संकेत है।
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