


























इमेज जनरेशन प्लेटफॉर्म के लिए मशहूर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी midjourney अब स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में बड़ा कदम रखने जा रही है। कंपनी ने "मिडजर्नी मेडिकल" की शुरुआत की है। इसके तहत कम लागत वाली पूर्ण-शरीर इमेजिंग प्रणाली विकसित की जा रही है। कंपनी का दावा है कि इस तकनीक के जरिए अल्ट्रासाउंड, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की मदद से 60 सेकंड से भी कम समय में पूरे शरीर को स्कैन कर तस्वीरें तैयार हो जाएंगी।
साथ ही कंपनी 'Midjourney Spa' नाम से वेलनेस सेंटरों का नेटवर्क भी शुरू करने की योजना बना रही है, जहां लोग नियमित स्कैन के साथ पारंपरिक स्पा सेवाओं का लाभ ले सकेंगे। कंपनी के मुताबिक "उपयोगकर्ता एक ऐसे प्लेटफॉर्म पर खड़े होंगे जिसके नीचे लगे अल्ट्रासाउंड सेंसर कई दिशाओं से ध्वनि तरंगें भेजेंगे। करीब पांच लाख सेंसर एलिमेंट ट्रांसमीटर और रिसीवर दोनों की तरह काम करेंगे। इनसे मिलने वाले डेटा को बड़े कंप्यूटिंग क्लस्टर में प्रोसेस कर ऐसी इमेज तैयार होगी, जो एमआरआई जैसी दिखाई देंगी, लेकिन इनमें विकिरण की जगह अल्ट्रासाउंड तकनीक का इस्तेमाल होगा।
मिडजर्नी और अल्ट्रासाउंड टेक्नोलॉजी कंपनी बटरफ्लाई मिलकर कर नई तकनीक पर काम
मिडजर्नी इस परियोजना को अमेरिकी अल्ट्रासाउंड टेक्नोलॉजी कंपनी बटरफ्लाई नेटवर्क के साथ मिलकर विकसित कर रही है। बटरफ्लाई ने बताया कि "मौजूदा प्रोटोटाइप में उसके 40 अल्ट्रासाउंड-ऑन-चिप इमेजिंग मॉड्यूल शामिल हैं। दोनों कंपनियों के बीच हुए समझौते के तहत बटरफ्लाई को अगले पांच वर्षों में 74 मिलियन डॉलर तक का भुगतान मिल सकता है।"
बटरफ्लाई नेटवर्क के अध्यक्ष, मुख्य कार्यकारी अधिकारी और चेयरमैन जोसेफ डेविवो ने कहा कि "मौजूदा स्वास्थ्य व्यवस्था बीमारी के इलाज पर केंद्रित है, जबकि भविष्य की स्वास्थ्य सेवाएं रोकथाम और समय रहते शरीर में होने वाले बदलावों की पहचान पर आधारित होंगी। उन्होंने इस स्कैनर को विकिरण मुक्त, कम लागत वाला और साप्ताहिक उपयोग के लिए उपयुक्त बताया है।"
2027 में पहला सार्वजनिक स्पा सेंटर, 2031 तक 50,000 स्कैनर का लक्ष्य
मिडजर्नी अगले वर्ष अपने हार्डवेयर और एल्गोरिदम को बेहतर बनाने, रिसर्च ट्रायल संचालित करने और पहली अनुसंधान सुविधा स्थापित करने की योजना बना रही है। कंपनी का लक्ष्य 2027 में सैन फ्रांसिस्को में पहला सार्वजनिक स्पा सेंटर खोलना है और उसके बाद अन्य शहरों में विस्तार करना है। कंपनी ने 2031 तक दुनिया भर में 50,000 से अधिक स्कैनर तैनात करने का लक्ष्य रखा है। उसका दावा है कि यह नेटवर्क हर महीने एक अरब तक स्कैन करने में सक्षम होगा और बड़ी आबादी को नियमित इमेजिंग सुविधा उपलब्ध करा सकेगा।
हालांकि इस महत्वाकांक्षी परियोजना के सामने कई तकनीकी और नियामक चुनौतियां मौजूद हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अल्ट्रासाउंड तकनीक चिकित्सा में स्थापित है, लेकिन पूरे शरीर की इस स्तर की इमेजिंग प्रणाली अभी तक व्यावहारिक रूप से सिद्ध नहीं हुई है। किसी भी चिकित्सीय उपयोग से पहले अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन सहित संबंधित नियामकों से मंजूरी जरूरी होगी। मिडजर्नी ने कहा है कि शुरुआती चरण में वह शरीर की संरचना से जुड़ी गैर-नैदानिक जानकारी उपलब्ध कराने पर ध्यान देगी और बाद में व्यापक चिकित्सा उपयोग के लिए नियामकीय स्वीकृतियां हासिल करने का प्रयास करेगी।
आकाश हेल्थकेयर सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नई दिल्ली के वरिष्ठ सलाहकार और इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. अभिषेक बंसल ने कहा कि "यह अवधारणा आकर्षक है, लेकिन यह देखना होगा कि तैयार होने वाली इमेजें नैदानिक उपयोग के लिए पर्याप्त गुणवत्ता रखती हैं या नहीं। उअल्ट्रासाउंड की अपनी सीमाएं हैं, खासकर फेफड़ों जैसे हवा से भरे अंगों और हड्डियों जैसी घनी संरचनाओं की इमेजिंग में।"
भारत में इस तकनीक को लागू करने पर पीसीपीएनडीटी अधिनियम सहित नियामकीय पहलुओं पर भी विचार करना होगा। हालांकि, उन्होंने माना कि एआई, इमेजिंग और कंप्यूटिंग में तेज प्रगति को देखते हुए यह तकनीक भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
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