Newsट्रेंडिंगइस राज्य में शराब पीने वालों को लग सकता है बड़ा झटका! नया टैक्स फॉर्मूला आते ही महंगी होंगी बोतलें
इस राज्य में शराब पीने वालों को लग सकता है बड़ा झटका! नया टैक्स फॉर्मूला आते ही महंगी होंगी बोतलें
इस राज्य के सरकार ने शराब पर नया टैक्स सिस्टम प्रस्तावित किया है, जिसमें अब टैक्स अल्कोहल कंटेंट के आधार पर तय होगा। इससे बीयर, व्हिस्की और अन्य शराब महंगी हो सकती है। सरकार का लक्ष्य राजस्व बढ़ाना है, जबकि आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर पड़ेगा।

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सिद्धारमैया की अगुवाई वाली कर्नाटक सरकार ने शराब की कीमतों और टैक्स ढांचे में बड़े बदलाव का प्रस्ताव दिया है। 18 अप्रैल को जारी ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में 1968 के एक्साइज नियमों में संशोधन सुझाए गए हैं, जिससे राज्य में शराब महंगी होने के संकेत मिल रहे हैं।
सरकार ने पहली बार 'Alcohol-in-Beverage (AIB)' का कॉन्सेप्ट पेश किया है। इसके तहत अब शराब पर टैक्स उसकी मात्रा या कैटेगरी के बजाय उसमें मौजूद अल्कोहल की मात्रा के आधार पर लगेगा। यानी व्हिस्की, रम, बीयर या वाइन- सभी की टैक्सिंग अब एक नए फॉर्मूले से होगी।
अभी तक ब्रुअर्स को कंपोजिशन और शुगर लिमिट जैसी डिटेल देनी होती थी, खासकर माल्ट-बेस्ड ड्रिंक्स के लिए। नए सिस्टम में यह फोकस बदलकर अल्कोहल कंटेंट पर आ जाएगा।
राजस्व बढ़ाने पर सरकार का फोकस
राज्य सरकार का मकसद राजस्व बढ़ाना है। नए टैक्स फ्रेमवर्क से शराब की कीमतों में बढ़ोतरी होगी, जिससे सरकारी खजाने को फायदा मिलने की उम्मीद है। ड्राफ्ट के मुताबिक, इंडियन-मेड फॉरेन लिकर (IMFL) जैसे व्हिस्की, ब्रांडी, जिन और रम पर एक्साइज ड्यूटी अब अल्कोहल कंटेंट और सेल कैटेगरी के हिसाब से तय होगी।
डिस्ट्रीब्यूटर लेवल पर एक समान ₹1,000 प्रति लीटर प्योर अल्कोहल की ड्यूटी लागू होगी, जिसमें दूसरे राज्यों और विदेशों से आने वाली शराब भी शामिल है।
बीयर पर भी बदले स्लैब
बीयर के लिए नए टैक्स स्लैब तय किए गए हैं। 5% तक अल्कोहल पर ₹12 प्रति बल्क लीटर और 5-8% के बीच ₹20 प्रति बल्क लीटर टैक्स लगेगा।
आम ब्रांड्स की कीमतों में बढ़ोतरी तय
नई व्यवस्था का असर सीधे ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक 180ml बोतल पर ₹10-25 तक कीमत बढ़ सकती है।
Original Choice करीब ₹95 से बढ़कर ₹115, Old Tavern ₹80 से ₹100, Raja Whisky ₹70 से ₹95 और Haywards ₹100 से ₹120 तक जा सकती है। प्रीमियम सेगमेंट पर भी असर ज्यादा दिखेगा क्योंकि टैक्स स्लैब प्राइस रेंज के हिसाब से फिर तय किए जाएंगे।
ड्राफ्ट में सेना, CAPF और पैरामिलिट्री कैंटीन के लिए अलग प्रावधान रखा गया है। इन सप्लाई पर मौजूदा व्यवस्था से अलग ट्रीटमेंट जारी रहेगा।
Edited By:
Gaurav
Published On:
Apr 22, 2026


























