





















Newsट्रेंडिंगगुजरात में डेटिंग ऐप के जरिए हनीट्रैप, 44 वर्षीय व्यक्ति से 31,000 रुपये की लूट की कहानी

आरोप है कि सातों आरोपियों ने 44 वर्षीय व्यक्ति से "पोलो" नामक समलैंगिक डेटिंग ऐप के माध्यम से दोस्ती की थी। (कृत्रिम कृत्रिम चित्र)
गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले में डेटिंग ऐप से जुड़ा हनीट्रैप का मामला सामने आया है। 44 वर्षीय एक व्यक्ति को कथित तौर पर एक गे-डेटिंग ऐप के जरिए टारगेट किया गया। पुलिस के मुताबिक यह पूरा मामला “पोलो” नामक ऐप के जरिए शुरू हुआ, जिसमें सात लोगों के एक गिरोह ने पहले पीड़ित से दोस्ती की और फिर उसे सुरेंद्रनगर शहर के बाहरी इलाके में स्थित एक सुनसान घर में बुलाया। जहां उसके साथ मारपीट की गई, उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो बनाकर 31,000 रुपये की उगाही भी की गई।
कैसे हुआ हंनीट्रैप?
जानकारी के अनुसार, पीड़ित ने एक डेटिंग ऐप डाउनलोड किया था और ऑनलाइन अजनबियों से बातचीत कर रहा था। इसी दौरान आरोपियों ने धीरे-धीरे उसका भरोसा जीत लिया और उसे मिलने के लिए तैयार कर लिया। जब वह सुरेंद्रनगर मेडिकल कॉलेज के पीछे स्थित घर पर पहुंचा, तो वहां पहले से सात लोग मौजूद थे। पुलिस जांच में सामने आया है कि वहां पहुंचते ही उसे घेर लिया गया, उसके साथ मारपीट की गई और जबरन उसके कपड़े उतारकर अश्लील फोटो और वीडियो रिकॉर्ड किए गए।
पुलिस ने बताया कि इसके बाद आरोपियों ने पीड़ित को धमकी दी कि अगर उसने पैसे नहीं दिए या घटना के बारे में किसी को बताया तो उसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए जाएंगे। डर के माहौल में पीड़ित से कथित तौर पर 31,000 रुपये नकद वसूले गए। इसके बाद वह किसी तरह वहां से निकलकर सीधे पुलिस के पास पहुंचा और शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने किया 7 आरोपियों को गिरफ्तार
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तकनीकी निगरानी और स्थानीय खुफिया जानकारी की मदद से जांच शुरू की और सातों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान साहिल चौहान, शक्ति बाजीपारा, भार्गव परमार, समीर कोडिया, फरदीन शेख, समीर दीवान और अंकित त्यागी के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि वसूली गई पूरी रकम बरामद कर ली गई है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी शक्ति बाजीपारा पहले भी हनीट्रैप से जुड़े दो मामलों में शामिल रह चुका है। पुलिस को शक है कि यह गिरोह सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप्स के जरिए लोगों को निशाना बनाकर ब्लैकमेलिंग का नेटवर्क चला रहा था।
पुलिस के अनुसार यह मामला संगठित हनीट्रैप गिरोह की ओर इशारा करता है, जो डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर पीड़ितों को फंसाता था। आरोपी पहले ऑनलाइन संपर्क बनाते थे, फिर भरोसा जीतकर सुनसान जगहों पर बुलाते थे और वहां आपत्तिजनक सामग्री रिकॉर्ड कर ब्लैकमेल करते थे। इस घटना के बाद पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या इस गिरोह ने पहले भी इसी तरीके से अन्य लोगों को निशाना बनाया है और क्या इसमें और लोग शामिल हैं।
Edited By:
franklin nigam
Published On:
Jun 18, 2026
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