























रिटायरमेंट के बाद वित्तीय योजना खत्म नहीं होती, बल्कि असली जरूरत वहीं से शुरू होती है। बढ़ती उम्र, महंगा इलाज और लगातार बढ़ती महंगाई के बीच वरिष्ठ नागरिकों के लिए ऐसा निवेश चुनना जरूरी हो जाता है, जो नियमित आय भी दे और बचत को सुरक्षित भी रखे।
भारत में ज्यादातर रिटायर्ड निवेशकों का फोकस अब एग्रेसिव वेल्थ क्रिएशन से हटकर कैपिटल प्रोटेक्शन, स्थिर इनकम और टैक्स एफिशिएंसी पर रहता है। ऐसे में सही एसेट एलोकेशन लंबी अवधि की वित्तीय सुरक्षा तय करता है।
सुरक्षित और नियमित आय वाले ऑप्शन
सरकार समर्थित योजनाएं आज भी वरिष्ठ नागरिकों के पोर्टफोलियो की सबसे मजबूत नींव मानी जाती हैं। Senior Citizen Savings Scheme (SCSS) मई 2026 में करीब 8.2% रिटर्न दे रही है। इसमें सरकार की गारंटी मिलती है और तिमाही इनकम का फायदा भी मिलता है।
वहीं Post Office Monthly Income Scheme (POMIS) करीब 7.4% मंथली रिटर्न देता है, जिससे रोजमर्रा के खर्चों को संभालना आसान होता है।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए बैंक FD भी कम जोखिम वाला ऑप्शन बना हुआ है। कई बैंक 7% से 8% तक ब्याज दे रहे हैं। FD में टेन्योर फ्लेक्सिबिलिटी और लिक्विडीटी का फायदा भी मिलता है।
इसके अलावा आरबीआई फ्लोटिंग रेट सेविंग बॉन्ड्स करीब 8.05% ब्याज दे रहे हैं। हालांकि इसमें सात साल का लॉक-इन होता है, लेकिन सरकारी सुरक्षा इसे भरोसेमंद बनाती है।
जिंदगीभर इनकम देने वाले ऑप्शन
इंश्योरेंस कंपनियों के तत्काल एन्युटी प्लान भी कई रिटायर्ड के बीच लोकप्रिय हैं। ये योजनाएं पूरी जिंदगी तय इनकम देती हैं और सेविंग खत्म होने के जोखिम को कम करती हैं।
हालांकि एन्युटी प्लान का रिटर्न आमतौर पर 6% से 7.5% के बीच रहता है और इनकी इनकम पूरी तरह टैक्सेबल होती है। इसलिए इनमें सीमित एलोकेशन की सलाह दी जाती है।
सिर्फ सुरक्षा नहीं, ग्रोथ भी जरूरी
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सिर्फ एफडी पर निर्भर रहने से महंगाई का खतरा बढ़ जाता है। समय के साथ महंगाई आपकी खरीदने की शक्ति कम कर सकती है। ऐसे में डेट म्यूचुअल फंड बेहतर लिक्विडीटी और टैक्स एफिशिएंसी दे सकते हैं। इनमें 6% से 7% तक रिटर्न की संभावना रहती है।
वहीं हाइब्रिड म्यूचुअल फंड इक्विटी और डेट दोनों में निवेश करते हैं और 7% से 10% तक रिटर्न दे सकते हैं। मोडरेट रिस्क लेने वाले रिटायर्ड लोगों के लिए ये बेहतर ऑप्शन माने जाते हैं।
सही रणनीति क्या?
फाइनेंशियल प्लानर्स का मानना है कि वरिष्ठ नागरिकों को किसी एक निवेश विकल्प पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। SCSS, एन्युटी और FD जैसे सुरक्षित विकल्पों के साथ कुछ हिस्सा ग्रोथ एसेट में रखना बेहतर रणनीति हो सकती है।
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