





















आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटी के एक डेमो के बाद डिजिटल सबूतों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। उन्होंने दिखाया कि टेलीग्राम पर भेजी गई एक PDF फाइल को बाद में बदला जा सकता है, जबकि उसका पुराना टाइमस्टैम्प वही बना रह सकता है। वी. कामकोटी ने अपने प्रदर्शन में बताया कि किसी खास समय पर मिली PDF को बाद में दूसरी फाइल से बदला जा सकता है, लेकिन देखने पर ऐसा लग सकता है कि वही पुरानी फाइल मौजूद है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा संभव है, तो कानूनी मामलों या जांच में टेलीग्राम के मैसेज और फाइलों को डिजिटल सबूत के तौर पर इस्तेमाल करने पर सवाल खड़े हो सकते हैं। उन्होंने लोगों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मौजूद जानकारी पर आंख मूंदकर भरोसा न करने की सलाह दी और साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने की जरूरत पर जोर दिया।
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