





















भारत में क्रेडिट कार्ड और 'फ्री लाउंज एक्सेस' का रिश्ता काफी पुराना है। कभी यह सुविधा केवल प्रीमियम कार्ड्स तक सीमित थी, लेकिन आज यह हर दूसरे व्यक्ति की जेब में है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस आलीशान लाउंज में आप फ्री में खाना खाते और आराम करते हैं, उसके पीछे बैंकों का असली 'खेल' क्या है? चलिए जानते हैं कि यह 'फ्री' की सुविधा बैंकों के लिए करोड़ों की कमाई का जरिया कैसे बनती है।
दिखने में 'फ्री', पर बैंक को पड़ती है भारी कीमत
जब आप एयरपोर्ट या रेलवे स्टेशन के लाउंज में अपना कार्ड स्वाइप करते हैं और केवल 2 या 25 रुपये कटते हैं, तो असल में बैंक उस एक विजिट के लिए लाउंज ऑपरेटर को लगभग 800 से 1,500 रुपये तक का भुगतान करता है। बैंकों के लिए यह सीधा नुकसान है, लेकिन वे इसे एक 'मार्केटिंग इन्वेस्टमेंट' की तरह देखते हैं।
कैसे होती है बैंकों की करोड़ों की कमाई?
कोई भी बैंक नुकसान में जाकर अपने ग्राहकों को कोई भी सुविधा नहीं देता। वे मुफ्त में एयरपोर्ट या रेलवे स्टेशन के लाउंज की सुविधा के बदले आपसे कई गुना ज्यादा वसूल लेते हैं जैसे-
1) सालाना फीस (Annual Fees): लाउंज एक्सेस देने वाले ज्यादातर कार्ड्स की सालाना फीस 500 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक होती है। लाखों ग्राहकों से मिलने वाली यह फीस बैंकों की सीधी कमाई है।
2) ब्याज का जाल (Interest Income): लाउंज जाने वाला ग्राहक अक्सर 'हाई स्पेंडर' होता है। अगर वह अपनी पेमेंट में एक दिन की भी देरी करता है, तो बैंक 40-50% तक का सालाना ब्याज वसूलते हैं।
3) मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR): जब आप अपना कार्ड कहीं स्वाइप करते हैं, तो मर्चेंट बैंक को 1-3% ट्रांजैक्शन फीस देता है। लाउंज के लालच में आप उसी कार्ड का इस्तेमाल हर जगह करते हैं, जिससे बैंक मोटा कमीशन कमाते हैं।
4) खर्च की शर्त (Spend-Based Eligibility): अब बैंकों ने नया खेल शुरू किया है। फ्री लाउंज के लिए आपको पिछले महीने या तिमाही में कम से कम 20,000 से 50,000 रुपये खर्च करने होंगे। यह शर्त आपको ज्यादा खर्च करने के लिए उकसाती है।
रेलवे लाउंज: नया उभरता हुआ बाजार
सिर्फ एयरपोर्ट ही नहीं, अब रेलवे स्टेशनों (जैसे दिल्ली, जयपुर, अहमदाबाद) पर भी आलीशान लाउंज खुल गए हैं। यहाँ भी बैंकों ने क्रेडिट कार्ड टाइप-अप कर लिए हैं। चूंकि रेल यात्रियों की संख्या हवाई यात्रियों से कई गुना ज्यादा है, इसलिए बैंकों के लिए नए ग्राहकों को लुभाने का यह सबसे आसान तरीका बन गया है।
2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, लाउंज में बढ़ती भीड़ और बढ़ते खर्च के कारण बैंकों ने अब अपने हाथ खींचने शुरू कर दिए हैं। हाल ही में कई बड़े बैंकों ने एंट्री-लेवल कार्ड्स से लाउंज की सुविधा हटा दी है या उसे भारी खर्च से जोड़ दिया है।
此内容由惯性聚合(RSS阅读器)自动聚合整理,仅供阅读参考。 原文来自 — 版权归原作者所有。