























पीएम मोदी ने स्वीडन के गोथेनबर्ग में यूरोप की सबसे बड़ी कंपनियों के चेयरमैन और CEOs के सामने भारत में निवेश बढ़ाने की जोरदार पैरवी की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगले पांच साल में हर कंपनी भारत के लिए 'एक नया और बड़ा कमिटमेंट' करे।
यह बैठक यूरोपीयन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री के मंच पर हुई, जिसे स्वीडन के प्रधानमंत्री Ulf Kristersson और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष Ursula von der Leyen ने एक साथ आयोजित किया। इसे हाल के साल में भारत-यूरोप कारोबारी रिश्तों की सबसे अहम बैठकों में माना जा रहा है।
पांच सेक्टर पर फोकस
पीएम मोदी ने भारत-यूरोप इंडस्ट्रियल साझेदारी के लिए पांच प्रमुख सेक्टर गिनाए हैं। इनमें टेलीकॉम और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, AI और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन एनर्जी, इंफ्रास्ट्रक्चर और मोबिलिटी, साथ ही हेल्थकेयर और लाइफ साइंसेज शामिल हैं।
उन्होंने 5G से 6G ट्रांजिशन, AI नेटवर्क, इलेक्ट्रिक व्हीकल, ग्रीन हाइड्रोजन, एयरोस्पेस, डिफेंस, वैक्सीन और डिजिटल हेल्थ जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया।
भारत हर प्रोजेक्ट के साथ खड़ा रहेगा- पीएम
मोदी ने उद्योग जगत के नेताओं से कहा कि क्या यहां मौजूद हर कंपनी भारत के लिए एक नया और बड़ा कमिटमेंट कर सकती है? क्या अगले पांच साल में कुछ फ्लैगशिप प्रोजेक्ट शुरू किए जा सकते हैं? भारत सरकार हर प्रोजेक्ट के साथ खड़ी रहेगी।
उन्होंने पिछले 12 साल में हुए सुधारों का भी जिक्र किया। GST, Insolvency and Bankruptcy Code, कॉरपोरेट टैक्स कटौती, PLI स्कीम और FDI नियमों में ढील को उन्होंने निवेश माहौल मजबूत करने वाले कदम बताया।
PM मोदी ने यह भी कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है, जहां 1.4 अरब की आबादी और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम मौजूद है।
यूरोप की बड़ी कंपनियां शामिल
बैठक में Vodafone, Ericsson, Nokia, ASML, SAP, Volvo Group, Airbus, AstraZeneca और Shell जैसी कंपनियों के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे।
पीएम मोदी ने भारत-यूरोप बिजनेस रिश्तों को स्थायी ढांचा देने के लिए कई प्रस्ताव भी रखे। इनमें सालाना इंडिया-यूरोप सीईओ राउंडटेबल, सेक्टर-स्पेशल वर्किंग ग्रुप, ERT इंडिया डेस्क और फ्लैगशिप प्रोजेक्ट्स की सरकारी समीक्षा जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। इन प्रस्तावों का मकसद निवेश प्रोजेक्ट को तेजी से आगे बढ़ाना और यूरोपीय कंपनियों के लिए भारत में कामकाज आसान बनाना है।
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