



















Top 100 Companies of the World: भारतीय शेयर बाजार में मंदी का हाहाकार जारी है, नतीजतन दुनिया की टॉप-100 कंपनियों की लिस्ट से भारत की कोई कंपनी अपनी जगह नहीं बना पाई है। भारतीय शेयर बाजार में लगातार जारी भारी बिकवाली और मंदी के दबाव के बीच देश के कॉर्पोरेट जगत के लिए एक निराश करने वाली खबर आई है।
बिजनेस टुडे ने ब्लूमबर्ग (Bloomberg) के डेटा के हवाले से आई मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार अपनी रिपोर्ट में बताया कि दुनिया की टॉप-100 सबसे मूल्यवान (Market Capitalisation) लिस्टेड कंपनियों की सूची में अब एक भी भारतीय कंपनी शामिल नहीं है।
पिछले कुछ समय से घरेलू शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और कंपनियों के कमजोर नतीजों के चलते भारतीय कंपनियों के मार्केट कैप में भारी गिरावट देखने को मिली है।
साल 2025 की शुरुआत में 3 कंपनियां थीं शामिल
बीते साल 2025 की शुरुआत में भारत की तीन बड़ी कंपनियां- रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL), एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) दुनिया की टॉप-100 कंपनियों की लिस्ट में मौजूद थीं, लेकिन आचानक आई मंदी ने इन सभी को इस एलीट क्लब से बाहर धकेल दिया है।
आईटी सेक्टर को लगा झटका
इस मंदी में सबसे करारी चोट भारत के आईटी सेक्टर को लगी है। देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर निर्यातक कंपनी TCS साल 2025 की शुरुआत में ग्लोबली 84वें स्थान पर थी, जो अब लुढ़ककर 314वें स्थान पर पहुंच गई है। वहीं, दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी इन्फोसिस (Infosys) सीधे 198वें स्थान से गिरकर 590वें स्थान पर आ गई है।
भारत की केवल तीन कंपनियां ही अब $100 बिलियन (100 अरब डॉलर) से अधिक के मार्केट कैप वाली बची हैं। इनमें रिलायंस इंडस्ट्रीज (करीब $198 बिलियन), एचडीएफसी बैंक ($124 बिलियन) और भारती एयरटेल ($113 बिलियन) शामिल हैं। जबकि टीसीएस, आईसीआईसीआई बैंक और एसबीआई जैसी कंपनियां इस आंकड़े से नीचे आ चुकी हैं।
क्या हैं गिरावट की मुख्य वजहें ?
एक्सपर्ट्स और वैश्विक ब्रोकरेज फर्मों के अनुसार, भारतीय बाजारों में इस बड़ी गिरावट के पीछे मुख्य रूप से कई कारण हैं जैसे कच्चे तेल की बढ़ती कीमते, मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव के चलते होर्मुज संकट, लगातार कमजोर होता भारतीय रुपया इसके मुख्य कारण हैं। भारत अपनी जरूरत का करीब 90% तेल आयात करता है, जिससे अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है।
इसके अलावा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय बाजारों से लगातार पैसा निकाला है। साथ ही महंगे वैल्युएशन और सुस्त ग्रोथ से भारतीय शेयरों की कीमतें उनकी कमाई के मुकाबले काफी महंगी हो गई। जबकि कंपनियों की मुनाफे की रफ्तार (Earnings Growth) सुस्त पड़ी है।
दुनिया में इन कंपनियों का है दबदबा?
जहां एक तरफ भारतीय कंपनियां इस रेस में पीछे छूटी हैं, वहीं विश्व स्तर पर अमेरिकी टेक कंपनियों का दबदबा बरकरार है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती मांग के दम पर एआई चिप बनाने वाली कंपनी एनवीडिया (Nvidia) $5.33 ट्रिलियन के मार्केट कैप के साथ दुनिया की सबसे वैल्यूएबल कंपनी बनी हुई है। इसके बाद अल्फाबेट (गूगल), एप्पल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन का नंबर आता है।
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